
जंतर मंतर पर गौ सेवक बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि,गौमांस पर पूर्ण प्रतिबंध लागू हो
नई दिल्ली:-अनिल सिंह चौहान :-राजधानी के जंतर मंतर पर आज अखिल भारतीय गौ सेवक समाज द्वारा गौ सेवक बलिदान दिवस के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विश्व प्रसिद्ध समाजसेवी और गौ सेवक डॉ. बसंत गोयल ने कहा-“गौ माता की सेवा और रक्षा ही सनातन धर्म की आत्मा है।जब तक गौ माता सुरक्षित नहीं, तब तक संस्कृति और सभ्यता सुरक्षित नहीं रह सकती।”कार्यक्रम में 7 नवम्बर 1966 को संसद भवन के बाहर हुए गौ हत्या विरोधी आंदोलन में बलिदान देने वाले गौ भक्तों को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।
सभा में ज्ञानेंद्र जी महाराज, दाती महाराज समेत कई संतों, गौ भक्तों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।गौ माता केवल आस्था नहीं, जीवनदायिनी हैं-डॉ. बसंत गोयल सभा को संबोधित करते हुए डॉ. गोयल ने कहा “गौ माता केवल पूजनीय ही नहीं, बल्कि मानव जीवन के लिए प्रत्यक्ष उपयोगी हैं।उनके दूध, मूत्र और गोबर में अनगिनत औषधीय गुण हैं, जिन्हें आधुनिक विज्ञान भी स्वीकार कर रहा है।उन्होंने बताया कि गाय का दूध मस्तिष्क को ताजगी और बुद्धि प्रदान करता है।
वेदों में कहा गया है कि ‘गव्यं आयुर्वर्धकं रसायनं बलवर्धनं च’-अर्थात गाय का दूध शरीर को सशक्त और मस्तिष्क को तेज बनाता है।डॉ. गोयल ने कहा कि “सनातन धर्म में यह मान्यता है कि जिस बालक को गाय का दूध पिलाया जाता है, वह भविष्य में अत्यंत बुद्धिमान, विनम्र और संस्कारी बनता है।”उन्होंने यह भी जोड़ा कि गौ मूत्र से रोगों का निवारण होता है, जबकि गौबर से तैयार उत्पादों से पर्यावरण शुद्ध रहता है।गौ उत्पादों को राष्ट्रीय संपदा घोषित करने की मांग की गई।डॉ. बसंत गोयल ने सरकार से आग्रह किया कि गौ उत्पादों (दूध, मूत्र, गोबर) को राष्ट्रीय जैविक संपदा घोषित किया जाए,ताकि इनके संरक्षण और उपयोग को प्रोत्साहन मिल सके।उन्होंने कहा कि गौ-आधारित उद्योगों से न केवल स्वदेशी अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। “गौ रक्षा केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि सामाजिक और वैज्ञानिक आवश्यकता है।
”,-डॉ.गोयल
हिंदू राष्ट्र की मांग के साथ गूंजा जंतर मंतरसभा में “भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करो”और“जय गौ माता” के नारे लगातार गूंजते रहे।
गौ सेवकों ने कहा कि गौ माता, गंगा और गीता-ये तीनों सनातन धर्म की आत्मा हैं।डॉ. गोयल ने इस अवसर पर घोषणा की कि अखिल भारतीय गौ सेवक समाज शीघ्र ही देशव्यापी गौ रक्षा जागरूकता यात्रा प्रारंभ करेगा।कार्यक्रम में उपस्थित संतों ने कहा कि वेदों में गौ को “अघ्न्या” अर्थात “जिसका कभी वध न हो” कहा गया है।श्रद्धांजलि सभा के दौरान संतों ने “गोमाता की आरती” की और बलिदान देने वाले गौ भक्तों के नाम पर दीप प्रज्वलित किए।पूरे परिसर में “जय गौ माता” और “हर हर महादेव” के उद्घोष गूंजते रहे।
डॉ. गोयल ने श्रद्धांजलि कार्यक्रम का नेतृत्व करते हुए स्पष्ट कहा- “भारत भूमि गौ माता की कृपा से ही धन्य है।अब समय आ गया है कि सरकार गौ रक्षा के लिए कठोर कानून बनाए और उसे सख्ती से लागू करे।”उन्होंने कहा कि “जो राष्ट्र अपनी गौ माता की रक्षा करता है, वही विश्व में आध्यात्मिक नेतृत्व कर सकता है।”सभा के अंत में सभी संतों ने मिलकर गौ रक्षा संकल्प लिया।कार्यक्रम में ज्ञानेंद्र जी महाराज, दाती महाराज, महंत जगदंबा दास, स्वामी विश्वेश्वरानंद सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।अंत में सामूहिक गौ आरती के साथ श्रद्धांजलि सभा का समापन
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