
Disaster-Resilient Roads to be Built in India, Technology Will Protect Roads from Natural Hazards
सड़क सुरक्षा बनेगी बेहतर, बुनियादी ढांचा नहीं होगा क्षतिग्रस्त
नई दिल्ली, प्रबल सिंह
भारत में नई तकनीक अपनाकर राष्ट्रीय राजमार्गो को प्राकृतिक खतरों से बचाया जाएगा। इसके तहत भविष्य की सभी राजमार्ग परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में नेशनल डेटाबेस फॉर इमरजेंसी मैनेजमेंट (एनडीईएम) पोर्टल के डेटा का उपयोग और विश्लेषण दर्ज करना अनिवार्य कर दिया है। इससे सड़कों को प्राकृतिक खतरों जैसे कि बाढ़, च्रकवात और भूस्खलन के प्रति अधिक लचीला बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। आपदा-रोधी सड़कें अधिक सुरक्षित, टिकाऊ व भरोसेमंद होंगी।
सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने इस संबंध में 11 नवंबर को आदेश जारी कर दिया है। इसमें राजमार्ग की डीपीआर में आपदा डेटा शामिल करना जरुरी होगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आपदा-रोधी डिजाइन में पिछले बाढ़, भूस्खलन, चक्रवात या भूकंप जैसी आपदाओं के डेटा का विश्लेषण किया जाएगा। इसके आधार पर सड़क के डिज़ाइन में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि उदाहरण के लिए बाढ़ संभावित क्षेत्रों में सड़क की ऊँचाई बढ़ाना या जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाया जाएगा। जोखिम कम करने के उपाय में यह डेटा कमजोर और दुर्घटना प्रोन क्षेत्र की पहचान करने में मदद करेगा, जहाँ आपदा के कारण सड़क को सबसे अधिक नुकसान पहुँचता है। निर्माण के दौरान समस्यास के उपाय लागू किए जा सकेंगे, जिससे सड़क की क्षति और बंद होने की संभावना कम हो जाएगी।
इससे बेहतर योजना और लागत अनुमान का सही आंकलन संभव होगा। अपदा से निपटने में बुनियादी ढांचे (जैसे रिटेनिंग वॉल, मज़बूत पुलिया) की लागत को शुरुआत में ही डीपीआर में शामिल किया जा सकेगा। आपदा-रोधी सड़कें मौसम की चरम घटनाओं का सामना करने में अधिक सक्षम होंगी। इससे सड़कों की लंबी उम्र बढ़ेगी और बार-बार होने वाले रखरखाव का खर्च कम होगा।
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आपदा डेटा अनिवार्य होने से सड़क यात्रियों की सुरक्षा मजबूत बनाएगा। आपदा-रोधी डिज़ाइन के कारण सड़क दुर्घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली मौतों और चोटों में कमी आएगी। भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में पहले से ही स्थिरिकरण के कार्य हो जाने से यात्रियों का जीवन सुरक्षित रहेगा। सड़कें आपदाओं के दौरान भी कम क्षतिग्रस्त होंगी व तेज़ी से मरम्मत योग्य होंगी। इससे सड़क बंद होने की अवधि कम होगी, यात्रियों को लंबी देरी और रूट बदलने की परेशानी से मुक्ति मिलेगी। यात्रा के समय और लागत में कमी आएगी। यात्रा की गति बनी रहेगी, इससे ईंधन की बचत होगी और यात्रा का समय कम होगा। डेटा के आधार पर बनी सड़कें बेहतर यातायात प्रबंधन करना आसान होगा।
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