
The national highways across the country will be free of black spots by 2028.
नई दिल्ली, अनिल सिंह चौहान
केंद्र सरकार ने देशभर के सभी राष्ट्रीय राजमार्गो के ब्लैक स्पॉट को 2027-28 तक पूरी तरह से समाप्त करने की घोषणा की है। इसके लिए सरकार ने नीति में ऐसा बदलाव किया है, जिससे भावी सड़क परियोजनाओं में ब्लैक स्पॉट नहीं बनेंगे। इसके लिए सरकार ने ब्लैक स्पॉट ठीक करने की जिम्मेदारी पूरी तरह से ठेकेदार और निर्माण कंपनी के कंधों पर डाल दी है। देश में होने वाली कुल सड़क दुर्घटनाएं में औसतन एक तिहाई मौते ब्लैक स्पॉट के कारण होती है, जबकि इसके चलते एक चौथायी हादसे होते हैं।
सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जनवरी-जून 2025 (छह माह) के दौरान 67,933 सड़क हादसे हुए हैं और इसमें 29,018 लोगों की मृत्यु हुई है। वर्ष 2024 कुल 1,25,873 सड़क हादसों में 53,090 मौते ब्लैक स्पॉट के कारण हुई। उन्होंने बताया कि देशभर में देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गो पर 13,795 ब्लैक स्पॉट की पहचाान की गई। इसमें मार्च 2025 तक 4,777 पर स्थायी सुधार पूरा कर लिया गया है। दावा है कि
शेष ब्लैक स्पॉट पर अल्पकालिक-दीर्घकालिक सुधार 2027-28 तक पूरा कर लिया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए नई नीति में ठेकेदार-निर्माण कंपनी की जवाबदेही तय की गई। इसमें जिस सेक्शन ब्लैक स्पॉट बनेगा, इसके सुधार उपाय लागू करने की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार-कंपनी की होगी। इसके अलावा सरकार के क्षेत्रीय अधिकारी (आरओ) को 50 करोड़ रुपये लागत की ब्लैक स्पॉट परियोजनाओं को टेंडर जारी करने व आवार्ड करने के लिए अधिकृत किया गया है। इसके लिए आरओ को एनएचएआई-मंत्रालय मुख्यालय में मंजूरी का इंतजार नहीं करना होगा।
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सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने बताया कि ठेकेदार को सड़क सुरक्षा ऑडिट के अनुसार पहचाने गए ब्लैक स्पॉट को ठीक करना होगा। इसमें सड़क की ज्यामिति में सुधार, जंक्शन सुधार, क्रैश बैरियर, रोड मार्किंग, साइनेज आदि जैसे अल्पकालिक और दीर्घकालिक सुधार उपाय शामिल हैं। ठेकेदार निर्माण के दौरान और उसके पश्चात भी सड़क सुरक्षा मानकों और गुणवत्ता नियंत्रण को बनाए रखने की जिम्मेदार होंगे। ताकि इंजीनियरिंग त्रुटियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
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वी. उमाशंकर ने बताया कि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ई-डीएआर (इलेक्ट्रॉनिक विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट) प्लेटफॉर्म भी स्थापित किया है। जोकि रियल टाइम डेटा के आधार पर दुर्घटना स्थलों को हटाने और सुरक्षा उपायों को बढ़ाने में मदद करेगा। जिससे मंत्रालय का अपने लक्ष्य वित्त वर्ष 2027-28 तक सभी ब्लैक स्पॉट्स का उन्मूलन कर सके।
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ब्लैक स्पॉट की परिभाषा :
राष्ट्रीय राजमार्ग के लगभग 500 मीटर के सेक्शन पर तीन कैलेंडर वर्षों की अवधि के भीतर पाँच या अधिक दुर्घटनाएं हुई हों, जिनके परिणामस्वरूप मृत्यु या गंभीर चोटें आईं हों अथवा दस मौतें हुई हों। उसे सरकार ब्लैक स्पॉट घोषित कर देती है।
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