
नई दिल्ली, अनिल सिंह चौहान
चलती ट्रेन में बासी-खराब खाने की शिकायतों के मामने में रेलवे के 70 फीसदी से अधिक कैटरिंग ठेकेदारों पर कार्रवाई नहीं होती है। आईआरसीटीसी महज 20 फीसदी ठेकेदारों पर दंडनात्मक कार्रवाई करते हुए जुर्माना लेती है और शेष का चेतावनी-बेहतर काम करने की सलाह देकर छोड़ देती है।
चलती ट्रेन में बासी-खराब खाने की शिकायतों के मामने में रेलवे के 70 फीसदी से अधिक कैटरिंग ठेकेदारों पर कार्रवाई नहीं होती है। आईआरसीटीसी महज 20 फीसदी ठेकेदारों पर दंडनात्मक कार्रवाई करते हुए जुर्माना लेती है और शेष का चेतावनी-बेहतर काम करने की सलाह देकर छोड़ देती है।
रेलवे मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 (1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025) में आईआरसीटीसी को को भोजन की गुणवत्ता से संबंधित कुल 6,645 शिकायतें प्राप्त हुईं। इसमें से विभाग ने महज 1,341 मामलों में ठेकेदारों पर जुर्माना लगाया गया और 2,995 मामलों में चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। जबिक 1,547 मामलों में ठेकेदारों को यात्रियों को गुणवत्तापरक खाना आपूर्ति की सलाह देते हुए क्षमा कर दिया गया। शेष 762 मामलों में अन्य अनुशासनात्मक और सुधारात्मक कदम उठाए गए।
रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ठेकेदारों पर लगाए गए जुर्माने की कुल राशि 13.2 करोड़ थी। जानकारों का कहना है कि ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई के रूप मे मोटा जुर्माना नहीं वसूलना व उनका लाइसेंस रद नहीं करना, बासी खाना, ठंडा खाना, खाने में कीट मिलना, खाने की तय दर से अधिक कीमत वसूलना, वेंडरों का दुर्व्यवाहर आदि के चलते सालाना 6000-7000 शिकायतें दर्ज होती है। उदाहरण के लिए 2023-24 में खानापान से जुड़ी 7,026 शिकायतें विभाग को प्राप्त हुईं। जानकारों का कहना है कि शिकायत के ज्यादातर मामलों को वेंडर यात्री को मनपसंद दूसरा भोजन देकर सुलझा लेते हैं और शिकायत दर्ज होने की नौबत नहीं आती है।
——————
——————
बॉक्स
रेलवे प्रवक्तता का अपना तर्क है उनका कहना है कि भारतीय रेल में प्रतिदिन औसतन 16.5 लाख भोजन की आपूर्ति की जाती है। इस संख्या को देखते हुए सिर्फ 6,645 शिकायतों दर्ज की गईं। यानी प्रतिदिन औसतन लगभग 46 शिकायतें दर्ज हो रही है। जबकि कुल परोसे गए भोजन का यह केवल 0.003 फीसदी मात्र है। अधिकारी का मानना है कि खाने की गुणवत्ता बनाए रखना प्रमुख मुद्दा है, विभाग की कोशिश है कि कोई यात्री खाने की गुणवत्ता को लेकर शिकायत नहीं करे।
———————
रेलवे प्रवक्तता का अपना तर्क है उनका कहना है कि भारतीय रेल में प्रतिदिन औसतन 16.5 लाख भोजन की आपूर्ति की जाती है। इस संख्या को देखते हुए सिर्फ 6,645 शिकायतों दर्ज की गईं। यानी प्रतिदिन औसतन लगभग 46 शिकायतें दर्ज हो रही है। जबकि कुल परोसे गए भोजन का यह केवल 0.003 फीसदी मात्र है। अधिकारी का मानना है कि खाने की गुणवत्ता बनाए रखना प्रमुख मुद्दा है, विभाग की कोशिश है कि कोई यात्री खाने की गुणवत्ता को लेकर शिकायत नहीं करे।
———————
Leave a Reply