
नई दिल्ली, अनिल सिंह चौहान
रेलवे बोर्ड ने ई-टिकट बुकिंग व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। यात्रियों द्वारा ऑनलाइन रेल टिकट खरीदते समय खाने की बुकिंग पर क्लिक करने पर सिर्फ शाकाहारी भोजन बुक होगा। रेलवे का दावा है कि इससे 80 फीसदी शाकाहारी यात्रियों को सहूलियत होगी। भोजन की बर्बादी रुकेगी और अवैध वेंडरों से सफर के दौरान बासी-घटिया भोजन से यात्रियों को छुटकारा मिलेगा।
रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ट्रेन में भोजन (मील) बुक करने और न करने के विकल्प का विकल्प होता है। पूर्व में यात्रियों को भोजन का विकल्प खुद चुनना पड़ता था, लेकिन अब नए सिस्टम में शाकाहारी भोजन को डिफ़ॉल्ट विकल्प बना दिया गया है।
यानी यात्री जब सेलेक्ट पैसेंजर सेक्शन में अपना विवरण भरेंगे, तो भोजन पसंद (मील प्रेफरेंस) में ऑटोमैटिक शाकाहारी विकल्प चुना हुआ मिलेगा।
इसके अलावा कोई यात्री शाकाहारी भोजन नहीं चाहता है, तो वह ड्रॉप-डाउन मेनू का उपयोग करके अपना पसंदीदा विकल्प चुन सकता है। इसमें नॉन-वेज, जैन मील, और डायबिटिक मील जैसे विकल्प उपलब्ध हैं। वहीं, जो यात्री ट्रेन का खाना चाहते हैं, उनके लिए अन्य पसंद के विकल्प के नीचे मुझे खाना-पेय नहीं चाहिए का एक स्पष्ट चेक-बॉक्स दिया गया है। यात्री खाना नहीं लेने का यह विकल्प चुनता है, तो सिस्टम पुष्टि करने के लिए एक पॉप-अप भी दिखाता है।
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रेलवे बोर्ड के कार्यकरी निर्देश (सूचना एवं प्रसारण) दिलीप कुमार ने बताया कि कई बार यात्री खाना नहीं लेने का विकल्प चुनते थे, लेकिन बाद में ट्रेन में खाने की मांग करते थे। ज़्यादातर ऐसे यात्रियों को यह पता ही नहीं होता था कि उनका खाना बुक नहीं है, क्योंकि अकसर उनके टिकट एजेंट या कोई और बुक करता था। जरुरतमंद यात्री मजबूरन अवैध वेंडरों से बासी-खराब खरीदने हैं, इससे रेलवे की बदनामी होती है। नई व्यवस्था से आईआरसीटीसी को खाने की मांग की सही जानकारी रहेगी। इससे खाना बर्बादी रुकेगी और प्रबंधन में आसानी रहेगी। विभाग नए बेस किचन का सही इस्तेमाल कर पाएगा और यात्रियों को बेहतर गुणवत्ता वाला और स्वच्छ भोजन आपूर्ति संभव होगी।
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