
नई दिल्ली, प्रबल सिंह
भारत में दोषपूर्ण डिजाइन और प्लानिंग के चलते एक्सेस कंट्रोल राष्ट्रीय राजमार्गो व एक्सप्रेस-वे पर वाहन मौत का यू-टर्न ले रहे हैं। इसके अलावा हाई स्पीड सड़कों पर विपरीत दिशा में वाहन चलाने (रॉन्ग साइड ड्राइविंग-डब्ल्यूएसडी) की समस्या से गंभीर सुरक्षा संकट खड़ा हो गया है। समय बचाने के लिए शार्टकट अपनाने की प्रवृत्ति में अकेले दिल्ली में इस प्रकार के सालाना 1.84 लाख (प्रतिदिन 504) मामले सीसीटीवी में दर्ज किए गए हैं।
सड़क परिवहन क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार मानवीय लापरवाही, दोषपूर्ण बुनियादी ढांचे और कमजोर प्रवर्तन का एक विनाशकारी मेल है। उन्होंने बताया कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश में सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में से एक गलत दिशा में ड्राइविंग भी है। 2017 इस कारण 29,148 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 9,527 लोगों की दर्दनाक मौत हुई और 30,124 लोग घायल हुए। 2022 में, विपरीत दिशा में वाहन चलाने के कारण देश भर में 9,094 लोग मारे गए । जोकि कुल मौतों का 5.4 फीसदी है।
एक्सेस कंट्रोल राजमार्ग व एक्सप्रेस-वे पर गलत दिशा में वाहन चलाने के पीछे कई जटिल कारक जिम्मेदार हैं। शॉर्टकट लेने की मानसिकता के चलते चालकों समय बचाने के लिए लंबे यू-टर्न या इंटरचेंज पर जाने के बजाय गलत दिशा में कुछ दूरी तय कर लेते हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के स्थानीय निवासी राजमार्गो को तोड़कर अनाधिकृत प्रवेश बना लेते हैं। जोकि हादसों को न्यौता देते हैं। 5000-1000 रुपये का चालान व एक वर्ष की कैद के बावजूद लोग नियमों का उल्लंघन करते हैं। जानकारों का कहना है कि उक्त हादसों के लिए दोषपूर्ण डिजाइन व प्लानिंग जिम्मेदार है।
कई एक्सप्रेस-वे पर निकास और यू-टर्न इतने दूर बनाए जाते हैं कि स्थानीय निवासी या चालक छोटी दूरी के लिए भी विपरीत दिशा में चलने को मजबूर हो जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क डिजाइन को उपयोगकर्ता की व्यावहारिक जरूरतों को भी ध्यान में रखना चाहिए। इसके अलावा इंटरचेंज और टोल प्लाजा के पास उचित, स्पष्ट और पर्याप्त साइनेज की कमी से चालक भ्रमित हो जाते हैं और गलती से गलत रैंप या लेन में प्रवेश कर जाते हैं। सीसीटीवी कैमरे और इंटरसेप्टर वाहन तैनात होने के बावजूद गलत दिशा में चल रहे वाहनों को तत्काल रोकने या पकड़ने में अक्सर यातायात पुलिस, परिवहन विभाग, लोकल पुलिस विफल रहती है।
———————-
बॉक्स
विशेषज्ञों की राय :
कड़े प्रवर्तन: गलत दिशा में वाहन चलाने वाले चालकों पर केवल जुर्माना नहीं, बल्कि सख्त कानूनी कार्रवाई (एफआईआर, ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करना) और यहां तक कि वाहन को जब्त करने जैसे कदम उठाए जाने चाहिए।
स्मार्ट टेक्नोलॉजी का उपयोग: कैमरा-आधारित चालान प्रणाली को और अधिक मजबूत और चौबीसों घंटे सक्रिय किया जाना चाहिए, जैसा कि लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर किया जा रहा है।
बुनियादी ढांचे में सुधार: एक्सप्रेस-वे पर स्पष्ट मार्किंग, पर्याप्त और सुलभ यू-टर्न की व्यवस्था करना, और अनाधिकृत प्रवेश को रोकने के लिए फिजिकल बैरियर लगाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
——————–
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे हादसा:
जुलाई 2023 को एक स्कूल बस चालक ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर गाजीपुर के पास करीब 10 किलोमीटर तक रॉन्ग साइड में बस चलाई। इस आत्मघाती गलती के कारण बस की एक कार से सीधी टक्कर हो गई, जिसमें। एक ही परिवार के 6 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट रूप से दिखा कि पुलिस और ट्रैफिक अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद बस को रॉन्ग साइड से एक्सप्रेस-वे पर चढ़ने से नहीं रोका गया।
—————-
Leave a Reply