
नई दिल्ली, प्रबल सिंह
केंद्र सरकार ने ठेकेदारों द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गो में घटिया निर्माण सामग्री इस्तेमाल करने अथवा हेराफेरी करने की प्रवृत्ति पर लगाम लगाने की तैयारी कर ली है। सरकार अब निर्माण सामग्री के बजाए बनाए गए राष्ट्रीय राजमार्गो का एक्स-रे कर गुणवत्ता की जांच करेगी। इसके लिए राजमर्ग को तोड़ना नहीं पड़ेगा। अत्याधुनिक तकनीक से लैस मोबइल गुणवत्ता वैन चलते फिरते राजमार्ग में की कंक्रटी, डामर, स्टील के घनत्व का पता लगा लेगी।
सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने इस बाबत सात नवंबर को मोबाइल गुणवत्ता नियंत्रण वैन (एमक्यूसीवी) संबंधी अनुरोध प्रस्ताव (आरएफपी) का मसौदा दस्तावेज़ जारी कर है और हितधारकों से 12 दिनों सुझाव-आपत्ति मांगे हैं। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एमक्यूसीवी का चार राज्यों राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक और ओडिशा में सफल प्रयोग हुआ है। इसमें राष्ट्रीय राजमार्ग-एक्सप्रेसवे कार्यों का परीक्षण करने के लिए एमक्यूसीवी का प्रयोग किया गया।
इसके तहत सरकार देश के अन्य राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्ग कार्यों के बिना तोड़फोड़ के परीक्षण के लिए एमक्यूसीवी की आपूर्ति, संचालन और रखरखाव सेवा की शुरूआत की जाएगी। सरकार अब विकसित राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेस-वे व निर्माणाधीन परियोजनाओं जांच का
निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि एमक्यूसीवी सड़कों की गुणवत्ता सत्यापन में इस्तेमाल की गई सामग्री (कंक्रीट, डामर, स्टील) और निर्माण तकनीक आवश्यक ताकत और घनत्व का पता लगाने में सक्षम है।
यह वैन बुनियादी संरचना के अंदर छिपी हुई दरारों, खाली जगहों और अन्य निर्माण संबंधी दोषों या अनियमितताओं का पता लगाना लगा सकेगी। यह पुलों, ऊपरी मार्गों और फुटपाथों की परतें भविष्य के यातायात भार को संभालने के लिए पर्याप्त मजबूती को सुनिश्चित करेगी। इसमें मोटाई और गहराई का मापन करना शुमार है। डामर या कंक्रीट की परतों की वास्तविक मोटाई की जाँच करना संभव होगा।
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राजमार्ग क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में पिछले एक दशक में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, जिसकी कुल लंबाई 1.46 लाख किलोमीटर से अधिक हो गई है। हालांकि निर्माण की तेज गति के बावजूद सड़कों की गुणवत्ता और उचित रखरखाव एक गंभीर चुनौती बनी हुई है, जिसके कारण हर साल 1.75 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं के शिकार हो रहे हैं। नई व्यवस्था से सड़क हादसों में कमी आने की संभावन है।
उन्होंने बताया कि खराब सड़कों के कारण न केवल दुर्घटनाएं होती हैं, बल्कि वाहनों का टूट-फूट, ईंधन की खपत में वृद्धि और यात्रा के समय में अनावश्यक वृद्धि होती है, जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम नागरिक पर पड़ता है। नई तकनीक व व्यवस्था भ्रष्टाचार पर नकेल कसने में अहम भूमिका निभाएगी।
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