नई तकनीक हिमालय क्षेत्र की सड़कों का भूस्खलन रोकेगी

The national highways across the country will be free of black spots by 2028.
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निर्माण के दौरान स्थानीय लोगों को इसकी अग्रिम सूचना मिलेगी

नई दिल्ली, प्रबल सिंह
केंद्र सरकार हिमालय के पहाड़ों पर राष्ट्रीय राजमार्ग के सफर को सुरक्षित बनाने के लिए नई तकनीक अपनाने जा रही है।
इसके लिए सरकार ने सड़क निर्माण के नए व सख्त सुरक्षा नियम लागू किए हैं। इसमें भूस्खलन रोकने को डीपीआर में एआई-लिडार ड्रोन सर्वे अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही स्थानीय लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर परियोजना के प्रत्येक चरण में भूस्खलन की एडवांस सूचना देने का प्रावधान किया गया है।

सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने इस बाबत सात नवंबर को दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। जिसमें विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (ईपीसी) कंट्रैक्ट दस्तावेजों में व्यापक बदलाव किया गया है। जिससे स्थानीय समुदायों और बुनियादी ढांचे को भूस्खलन के विनाशकारी प्रभाव से बचाया जा सके। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब वर्तमान अथवा प्रस्तावित एलाइनेंट के मध्यम (सड़क के केंद्र से) 150-150 (कुल 300 मीटर) चौड़ी पट्टी की विशेषताओं का विस्तृत मापन व मानचित्रण करना होगा।

उन्होंने बताया कि निर्माण स्थल का मूल खाका या नक्शा बनाना होगा। इसमें भूमि की सीमाएँ, मौजूदा संरचनाएँ, स्थलाकृति (ऊंचाई और स्वरूप), प्रस्तावित लेआउट और अन्य मूलभूत जानकारी शामिल होती है। इस भूस्खलन मानचित्रण में पिछली भूस्खलनों की इन्वेंट्री का संग्रह और अध्ययन आवश्यक होगा। इसके अलावा राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग एजेंसी (एनआरएसए) द्वारा विकसित ऑनलाइन संसाधनों से उपलब्ध ऐतिहासिक डेटा का उपयोग किया जाएगा। डिजिटल एलिवेशन मॉडलिंग (डीईएम) से ढलान की गति (मिमी-वर्ष) का विश्लेषण किया जाएगा।

डीईएम तकनीक में डेटा कंप्यूटर में संख्याओं के रूप में स्टोर किया जाता है। समुद्र तल से ऊपर की ऊँचाई को दर्शाता है। यह पृथ्वी की सतह का एक गणितीय और ग्राफिक प्रतिनिधित्व है। घाटी के ढलान के लिए उप-सतह और सतह जल निकासी सहित सुरक्षा उपायों को विस्तृत भू-तकनीकी जांच के आधार पर डिज़ाइन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कटाव और ढलान अस्थिरता को रोकने के लिए प्रभावी अवरोधन और पहाड़ी अपवाह के निपटान हेतु कैच वाटर ड्रेन (सीडब्ल्यूडी) के निर्माण के लिए पुलियों-संरचनाओं के स्थानों पर अतिरिक्त भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा।
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अग्रिम चेतावनी: परियोजना के सभी चरणों में आस-पास के निवासियों को नियमित रूप से सूचित किया जाएगा और संभावित भूस्खलन के लिए अग्रिम चेतावनी जारी करने की व्यवस्था होगी।
निर्माण अवधि: भूस्खलन की निगरानी और संभावित भूस्खलनों के लिए जल्दी चेतावनी प्रणाली के प्रावधान के साथ निर्माण की अवधि पर्याप्त होनी चाहिए।
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