
सर्विस रोड़ और मुख्य हाईवे का यातायात सुगम व निर्बाध होगा
नई दिल्ली, अतुल सिंह (सोनू)
केंद्र सरकार ने सर्विस रोड-स्लिप रोड को मजबूत, टिकाऊ और गड्ढा मुक्त बनाने के लिए नए मानक लागू किए हैं। इसमें फुटपाथ को कंक्रीट बनाने का प्रावधान भी किया गया है। इससे देशभर राष्ट्रीय राजमार्गो की सर्विस रोड़ को वैज्ञानिक तरीके से एक समान डिजाइन से निर्माण कराने का रास्ता साफ हो गया है। करोड़ों सड़क यात्री सर्विस रोड व मुख्य हाई पर सुगम व निर्बाध सफर लुफ्त उठा सकें, वहीं जाम, सड़क हादसों में कमी आएगी।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सोमवार को राष्ट्रीय राजमार्ग की सर्विस रोड-स्लिप रोड व फुटपाथ के प्रकार संबंधी नए कड़े दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। नए मानक का उद्देश्य इन सहायक सड़कों (सर्विस रोड-स्लिप रोड) की क्षमता, स्थायित्व और सेवा क्षमता में सुधार करना है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं अपनी अनुमानित निर्माण अवधि से काफी अधिक विलंबित हो जाती हैं। इस कारण, मुख्य राजमार्ग पर भारी यातायात लंबे समय तक सर्विस रोड पर मोड़ दिया जाता है।
इसके अलावा मुख्य राजमार्ग पर निर्माण, रखरखाव या अतिरिक्त कार्य होता है, तब भी यातायात का भार सर्विस रोड पर आ जाता है, जिससे सर्विस रोड-स्लिप रोड पर दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है।शहरी या औद्योगिक क्षेत्रों में सर्विस रोड पर स्थानीय यातायात जमा हो जाता है। अनपेक्षित यातायात दबाव के कारण सर्विस रोड तेज़ी से खराब हो जाते हैं, जिससे गड्ढे हो जाते हैं और रखरखाव की लागत बढ़ जाती है। इन समस्याओं को देखते हुए मंत्रालय ने प्रारंभिक डिजाइन चरण में ही सर्विस-स्लिप रोड के लिए पर्याप्त क्षमता वृद्धि और डिज़ाइन जीवन संबंधी विचार शामिल करना अनिवार्य कर दिया है। वर्तमान में सर्विस रोड के डिज़ाइन के लिए कोई समान वैज्ञानिक आधार नहीं था। अब निर्माण के दौरान और बाद में एकरूपता, सेवा क्षमता और स्थायित्व सुनिश्चित होगा।
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सर्विस रोड-स्लिप रोड क्षमता व डिजाइन बनाते समय आधार यातायात, विकास दर, वाहन क्षति कारक (वीडीएफ) कारकों का ध्यान रखा जाएगा। सर्विस रोड में मजबूत सामग्री का प्रयोग किया जाएगा। जल-जमाव को रोकने के लिए सभी सर्विस-स्लिप रोड में उचित पर्याप्त जल निकासी सुनिश्चित की जाएगी। फुटपाथ क्रस्ट की न्यूनतम मोटाई पर्याप्त रखने के प्रावधान होंगे। बिटुमिनस बाइंडर कोर्स 60 मिमी से कम नहीं होगा। कठोर फुटपाथ (कंक्रीट) को प्राथमिकता दी जाएगी। उच्च वर्षा-जल-जमाव क्षेत्र कठोर फुटपाथ बनेंगे।
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