
नई दिल्ली, अनिल सिंह चौहान
भारतीय रेल ने सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो प्रचारित करने वाले के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनान का निर्णय लिया है। त्यौहारी मौसम में करोड़ों रेल यात्रियों को अपने घरों तक भेजने के लिए दिनरात जद्दोजहद क रहे रेलवे की छवि को फेक न्यूज ब्रिग ऐसे भ्रामक प्रचार के जरिए खराब कर रहे हैं। रेलवे ने रेलवे ने ऐसे भ्रम फैलाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का का फैसला किया है।
रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (आईपी) दिलीप कुमार ने कहा कि जो भी सोशल मीडिया हैंडल्स जानबूझकर पुराने या भ्रामक वीडियो (जैसे अत्यधिक भीड़ या अव्यवस्था वाले दृश्य) प्रसारित कर यात्रियों में भ्रम और असंतोष पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। रेलवे प्रशासन ने अपनी चौबीसों घंटे की सोशल मीडिया निगरानी के दौरान ऐसे 20 से भी ज़्यादा सोशल मीडिया हैंडल्स की पहचान कर ली है।
दिलीप कुमार ने बताया कि इनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह कदम असामाजिक तत्वों को स्पष्ट संकेत है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मनमानी अब बर्दाश्त नहीं होगी। भ्रामक वीडियो रेलवे की छवि को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि रेलवे देश की जीवनरेखा माने जाने वाले संस्थान की छवि पर ये भ्रामक वीडियो एक डिजिटल स्ट्राइक की तरह काम करते हैं। ये न केवल यात्रियों के बीच पैनिक पैदा करते हैं, बल्कि रेलवे के 12 लाख से अधिक कर्मचारियों के अथक परिश्रम और बेहतर हो रही सेवाओं (वंदे भारत, आधुनिक स्टेशन, सुरक्षा उपाय) की सकारात्मक छवि को भी धूमिल करते हैं।
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बॉक्स
रेलवे की अपील, तथ्य जाँचें, अफवाह नहीं
रेलवे ने सभी सोशल मीडिया यूजर्स से अपील की है कि वे किसी भी वीडियो को साझा करने से पहले उसके तथ्यों की गहन जाँच करें। स्टेशनों पर भीड़भाड़ या अव्यवस्था के पुराने वीडियो को वर्तमान स्थिति मानकर प्रसारित करने से बचें। यात्रियों को भी सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों पर ही भरोसा करें।
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किस प्रकार के भ्रामक वीडियो होते है प्रसारित
पुरानी-एडिटेड भीड़भाड़ वाले वीडियो : त्योहारों और छुट्टियों के दौरान भीड़भाड़ वाले वीडियो बहुत प्रसारित किए जाते हैं। इससे अव्यवस्था और कुप्रबंधन की धारणा बनती है, जिससे यात्रियों में भय और निराशा फैलती है। | इसके अलावा सुरक्षा से जुड़े भ्रामक दावे जैसे अग्निकांड या हादसा के वीडियो वॉयरल किए जाते हैं।
जोकि रेलवे सुरक्षा पर प्रश्न चिन्ह लगाते हैं। यह वीडिया किसी रेल हादसे के बाद प्रसारित होते हैं। रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाते स्टंट-रील को लेकर 300 से अधिक युवाओं की गिरफ्तारी हुई है। इससे कानून-व्यवस्था के प्रति लापरवाही का संदेश जाता है, और रेलवे सुरक्षा खतरे में पड़ती है।
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भारतीय रेल ने सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो प्रचारित करने वाले के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनान का निर्णय लिया है। त्यौहारी मौसम में करोड़ों रेल यात्रियों को अपने घरों तक भेजने के लिए दिनरात जद्दोजहद क रहे रेलवे की छवि को फेक न्यूज ब्रिग ऐसे भ्रामक प्रचार के जरिए खराब कर रहे हैं। रेलवे ने रेलवे ने ऐसे भ्रम फैलाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का का फैसला किया है।
रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (आईपी) दिलीप कुमार ने कहा कि जो भी सोशल मीडिया हैंडल्स जानबूझकर पुराने या भ्रामक वीडियो (जैसे अत्यधिक भीड़ या अव्यवस्था वाले दृश्य) प्रसारित कर यात्रियों में भ्रम और असंतोष पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। रेलवे प्रशासन ने अपनी चौबीसों घंटे की सोशल मीडिया निगरानी के दौरान ऐसे 20 से भी ज़्यादा सोशल मीडिया हैंडल्स की पहचान कर ली है।
दिलीप कुमार ने बताया कि इनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह कदम असामाजिक तत्वों को स्पष्ट संकेत है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मनमानी अब बर्दाश्त नहीं होगी। भ्रामक वीडियो रेलवे की छवि को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि रेलवे देश की जीवनरेखा माने जाने वाले संस्थान की छवि पर ये भ्रामक वीडियो एक डिजिटल स्ट्राइक की तरह काम करते हैं। ये न केवल यात्रियों के बीच पैनिक पैदा करते हैं, बल्कि रेलवे के 12 लाख से अधिक कर्मचारियों के अथक परिश्रम और बेहतर हो रही सेवाओं (वंदे भारत, आधुनिक स्टेशन, सुरक्षा उपाय) की सकारात्मक छवि को भी धूमिल करते हैं।
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रेलवे की अपील, तथ्य जाँचें, अफवाह नहीं
रेलवे ने सभी सोशल मीडिया यूजर्स से अपील की है कि वे किसी भी वीडियो को साझा करने से पहले उसके तथ्यों की गहन जाँच करें। स्टेशनों पर भीड़भाड़ या अव्यवस्था के पुराने वीडियो को वर्तमान स्थिति मानकर प्रसारित करने से बचें। यात्रियों को भी सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों पर ही भरोसा करें।
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किस प्रकार के भ्रामक वीडियो होते है प्रसारित
पुरानी-एडिटेड भीड़भाड़ वाले वीडियो : त्योहारों और छुट्टियों के दौरान भीड़भाड़ वाले वीडियो बहुत प्रसारित किए जाते हैं। इससे अव्यवस्था और कुप्रबंधन की धारणा बनती है, जिससे यात्रियों में भय और निराशा फैलती है। | इसके अलावा सुरक्षा से जुड़े भ्रामक दावे जैसे अग्निकांड या हादसा के वीडियो वॉयरल किए जाते हैं।
जोकि रेलवे सुरक्षा पर प्रश्न चिन्ह लगाते हैं। यह वीडिया किसी रेल हादसे के बाद प्रसारित होते हैं। रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाते स्टंट-रील को लेकर 300 से अधिक युवाओं की गिरफ्तारी हुई है। इससे कानून-व्यवस्था के प्रति लापरवाही का संदेश जाता है, और रेलवे सुरक्षा खतरे में पड़ती है।
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