किसानों को पांच रुपये फसल बीमा क्लेम देना भद्दा मजाक है : शिवराज चौहान

Giving farmers a crop insurance claim of five rupees is a cruel joke: Shivraj Chouhan

किसानों पांच रुपये फसल बीमा क्लेम देने भद्दा मजाक है : शिवराज चौहान
-कृषि मंत्री ने फसल बीमा शिकायतों की गहन जांच के आदेश दिए

नई दिल्ली, अनिल सिंह चौहान
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवा को कहा कि किसानों को 1,2 या 5 रुपये का फसल बीमा क्लेम देना उनके साथ भद्दा मजाक है। उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के संबंधित शिकायतों की गहन जांच करने के निर्देश दिए हैं। उच्च स्तरीय बैठक में चौहान ने बीमा कंपनी व कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की जमकर फटकरा लगाई।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि नाम मात्र की फसल बीमा क्लेम देने के मामलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को क्लेम राशि शीघ्र और एक साथ मिलनी चाहिए तथा क्षति का आंकलन सटीक और वैज्ञानिक प्रणाली से होना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक सुरक्षा कवच के रूप में संचालित की जा रही है, लेकिन कुछ मामलों में मिली शिकायतें योजना की साख को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सीहोर जिले के कुछ किसानों को फसल बीमा कराने के बावजूद नुकसान होने पर जीरो लास दिखाया गया और मात्र 1 रुपये का क्लेम दिया गया। उन्होंने सवाल किया कि यह कौन-सी पद्धति है जिससे क्षति का इतना अल्प आंकलन हुआ।

बैठक में शिवराज सिंह ने महाराष्ट्र के कृषि आयुक्त, राज्य के वरष्ठि अधिकारियों और अकोला जिले के कुछ किसानों को भी वर्चुअल रूप से जोड़ा। उन्होंने किसानों से विस्तार से जानकारी लेकर संबंधित अफसरों और बीमा कंपनियों से जवाब मांगा। अफसरों द्वारा क्लेम की रकम एडजस्टमेंट या तकनीकी प्रक्रिया के चलते कम दिखाने की बात पर केंद्रीय मंत्री ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसी विसंगतियों को तुरंत दूर किया जाए।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के सीईओ को सभी मामलों की फील्ड जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि 1, 2 या 5 रुपये के क्लेम देने के मामलों की तह तक जाकर पड़ताल की जाए और यह सुनश्चिति किया जाए कि किसानों को वास्तविक नुकसान के अनुसार मुआवजा मिले। उन्होंने निर्देश दिया कि बीमा कंपनियों का प्रतिनिधि सर्वेक्षण के समय अनिवार्य रूप से उपस्थित रहे ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
केंद्रीय मंत्री ने बैठक में यह भी कहा कि कुछ राज्य अपने हिस्से की सब्सिडी समय पर जमा नहीं करते, जिससे किसानों को क्लेम राशि में देरी होती है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राज्यों से समन्वय कर राशि समय पर जमा कराई जाए और देरी करने वाले राज्यों से 12 प्रतिशत ब्याज वसूला जाए। चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और किसी भी स्तर पर उनकी उपेक्षा या अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने योजना में तकनीकी सुधार और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सुझाव भी मांगे ताकि भवष्यि में इस तरह की विसंगतियां न हों।
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