
नई दिल्ली, अनिल सिंह चौहान
केंद्र सरकर की बहुप्रतिक्षित सेटेलाइट से टोल टैक्स वसूलने की योजना खटाई में पड़ गई है। फिलहाल इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। वाहनों में ट्रैकिंग डिवाइस लगाने से सरकार को उक्त तकनीक में जासूसी होने का खतरा सता रहा है। इसके अलावा आम जनता की निजता से समझौता होगा।
सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय की राष्ट्रीय राजमार्गो को टोल प्लाजा मुक्त बनाने और जितनी दूरी, उतना टोल टैक्स सैटेलाइट आधारित टोल टैक्स वसूली योजना (जीएनएसएस) को को स्थगित कर दिया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह फैसला देश की सुरक्षा और आम नागरिकों की निजता को ध्यान में रखते हुए लिया है। इस तकनीक में 24 घंटे ट्रैकिंग से वाहनों पर आसानी से नजर रखी जा सकती है।
क्योंकि इसमें हर वाहन में एक ऑन बोर्ड यूनिट (ओबीयू) ट्रैकिंग डिवाइस लगाना अनिवार्य है।
इससे वाहन के रूट, स्टापेज, गति, गंतव्य आदि का आसानी से पता लगाया जा सकता है। यह डिवाइस वाहन किस हाईवे पर है इसका पता लगाने के साथ वाहन कहां-कहां गया, किस रूट से गुजरा और कहां कितनी देर रुका (ठहराव) आदि का रिकार्ड दर्ज करता है। इससे किसी व्यक्ति की निजी जिंदगी में ताक-झांक करना संभव होगा। इस जद में आम नागरिक सहित देश के वीआईपी भी आ जाएंगे। सरकार को डर है कि यदि सैटेलाइट सिस्टम में यह डेटा स्टोर होने लगा कि किस वक्त कौन वीआईपी किस रूट पर है या कहां रुका है, और यह डेटा लीक हो गया या हैक कर लिया गया तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा बन सकता है।
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सरकार ने बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेसवे और हरियाणा के कुछ हिस्सों में इसका ट्रायल भी शुरू किया गया था। योजना थी कि गाड़ी जितनी दूरी हाईवे पर तय करेगी, सैटेलाइट के जरिए उतना ही पैसा सीधे बैंक खाते से कट जाएगा।
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सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने हिंदुस्तान को बताया कि सेटेलाइट से टोल टैक्स संग्रहण की योजना को स्थगति कर दिया गया है। वाहन की लोकेशन का पता लगाने और वाहन चालक का डाटा का पता लगाना संभव था। मंत्रालय ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर ) योजना पर काम कर रही है। इसमें गाड़ी में कोई ट्रैकिंग डिवाइस लगाने की जरूरत न पड़ेगी। हाईवे पर लगे कैमरे गाड़ी की नंबर प्लेट पढ़कर मौजूदा फास्टैग वॉलेट से ही पैसा काट लेंगे।
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